भाजपा ने आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। जहां एक ओर लंबे समय से नेता विपक्ष को लेकर बने असमंजस की स्थिति पर विराम लगा दिया है। वहीं दूसरी ओर पार्टी के अंदर गुटबाजी को भी समाप्त करने की कोशिश की है। बाबूलाल को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपे जाने के बावजूद राजनीति हलकों में कहा जा रहा था कि पार्टी में रघुवर दास और अर्जुन मुंडा जैसे कद्दावर नेताओं को साथ लेकर चलना बड़ी चुनौती होगी। बहरहाल, सबसे पहले भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने अमर बाउरी को विधायक दल का नेता चुनकर संदेश दिया कि अब वह किसी भी प्रकार के ऊहापोह की स्थिति को समाप्त करना चाहती है। इसके साथ ही भाजपा ने एक तीर से कई निशाने चल कर जातीय गणित को भी साधने की कोशिश की है।
जानकारों की मानें तो झारखंड में पिछड़ों की आबादी 55 प्रतिशत के आसपास है। वहीं 26.3 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है। इसके साथ ही करीब 11 प्रतिशत दलित (एससी) की आबादी है। इसलिए भाजपा की ओर से आबादी के हिसाब से पार्टी और सरकार में नेताओं को जगह दी जा रही है। जिस तरह से पिछड़ों की आबादी है, उसी हिसाब से चार बड़े नेताओं रघुवर दास, अन्नपूर्णा देवी, बिरंची नारायण और जयप्रकाश भाई पटेल को संगठन और सरकार में जिम्मेदारी दी गई है। वहीं दो बड़े आदिवासी चेहरे बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा को प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। दलित नेता अमर कुमार बाउरी पर पार्टी नेतृत्व ने बड़ा दाव खेला है। उन्हें विधायक दल का नेता बनाया गया है।
बता दें कि अमर कुमार बाउरी वर्तमान में झारखंड के चंदनकियारी से विधायक और भाजपा एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वह एक युवा और ऊर्जावान नेता हैं। पिछली रघुवर दास सरकार में वे खेल एवं युवा मामलों के मंत्री थे। अमर बाउरी 2014 में जेवीएम के टिकट पर चुनाव जीतकर झारखंड विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही दिन बाद वह बीजेपी में शामिल हो गए और उन्हें मंत्री बनाया गया।
Diese Geschichte stammt aus der November 2023-Ausgabe von DASTAKTIMES.
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प्रकृति, संस्कृति और स्त्री का बहुआयामी विमर्श
स्त्री चेतना, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी सुप्रतिष्ठित लेखिका आकांक्षा यादव के आलेखों का संग्रह 'प्रकृति, संस्कृति और स्त्री' को पढ़ते हुए जहां हम विषयवार उनके विचारों, विवरणों और विवेचनों से प्रभावित होते हैं, वहीं हम निबंध विधा के महत्व को भी जान पाते हैं।
जन-गण-मन का भाग्य विधाता है संविधान
भारतीय गणतंत्र अमर है लेकिन राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा है। न्यायपालिका संविधान की जिम्मेदार संरक्षक है। न्यायपीठ ने प्रशंसनीय फैसले किए हैं। अदालतों में लंबित लाखों मुकदमे 'न्याय में देरी से अन्याय के सिद्धांत' की गिरफ्त में हैं। अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति का स्वातंत्र्य देता है। अनुच्छेद 20 अन्य बातों के अलावा, 'किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति को अपने ही विरुद्ध गवाही देने के लिए बाध्य करने से रोकता' है।
संकट में पाकिस्तानी शिया
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डिजिटल अरेस्ट डर के आगे हार!
आज के युग में मोबाइल या लैपटॉप आम आदमी के जीवन में काफी प्रसांगिक ये हैं। लेकिन डिजिटल विकास तमाम खूबियां के साथ कुछ खामियां भी लाया है। सात समुंदर पार बैठा शख्स भी किसी से नजदीकियां बढ़ा सकता है, लेकिन इस शख्स की सोच के बारे में कोई डिवाइस नहीं बता सकती है कि वह किस श्रेणी का इंसान है। यहीं से साइबर क्राइम की शुरुआत होती है।
शीतकालीन चारधाम यात्रा में भी गुलजार होगी देवभूमि
शीतकाल के छह महीने भगवान बदरी विशाल की पूजा चमोली जिले में स्थित योग-ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर व नृसिंह मंदिर जोशीमठ, बाबा केदार की पूजा रुद्रप्रयाग जिले में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ और मां गंगा व देवी यमुना की पूजा क्रमशः उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगा मंदिर मुखवा (मुखीमट) और यमुना मंदिर खरसाली (खुशीमठ) में होती है।
कैसे अमेरिकी जासूसों की चीफ बनी - प्रिंसेज ऑफ द आरएसएस
बहुत जल्द अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों की कमान नवनियुक्त निदेशक तुलसी गबाई के हाथ में होगी। अमेरिका की पहली हिंदू सांसद तुलसी का आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पुराना रिश्ता रहा है। संघ परिवार से जुड़े भारतीय मूल के अमेरिकी हिंदू नागरिक उनके लिए हर चुनाव में लाखों डालर का चंदा जुटाते हैं। आरएसएस के इसी दुलार के कारण अमेरिका में तुलसी 'प्रिंसेज ऑफ द आरएसएस' के नाम से चर्चित हैं। पहले तुलसी का डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ना फिर अचानक डोनाल्ड ट्रम्प को समर्थन देना और फिर रिपब्लिकन पार्टी का दामन थामकर इस मुकाम तक पहुंचना हॉलीबुड के किसी हाई प्रोफाइल पॉलिटिकल ड्रामे से कम नहीं। भारतीय मामलों में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की बेवजह 'अति सक्रिय' होने के बाद अचानक खुफिया एजेंसियों की कमान तुलसी गबार्ड को दिए जाने को भारत के कूटनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है।
प्रदूषण से सांसत में जान
दिल्ली राजधानी क्षेत्र में आजकल हवा में पीएम 10 का स्तर 318 और पीएम 2.5 का स्तर 177 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा है जिसके फिलहाल कम होने की उम्मीद बेमानी है। जबकि स्वास्थ्य की दृष्टि से पीएम 10 का स्तर 100 से कम और पीएम 2.5 का स्तर 60 से कम ही उचित माना जाता है। खतरनाक स्थिति यह है कि दिल्ली के आसमान पर अब धुंध की परत साफ दिखाई दे रही है।
पीके अपनी पार्टी की रणनीति में हुए फेल
पीके के नाम से मशहूर प्रशांत किशोर ने जनसुराज पार्टी बनाने के करीब 40 दिन बाद अपने प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाया। प्रत्याशियों का चयन बहुत सोच-समझ किया गया। पीके की ओर से जीत के दावे भी थे, लेकिन वह परिणाम के रूप में सामने नहीं आ सके। हालांकि, पीके इस बात से थोड़े खुश जरूर होंगे कि तीन सीटों पर जनसुराज के प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे।