वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली कमोबेश वित्तीय तंत्र में अधिक सहजता के साथ अपनी जगह बना चुकी है। जीएसटी प्रणाली के अस्तित्व में आने के लगभग सात वर्ष बाद कर संग्रह से जुड़े आंकड़े में निरंतर बढ़ोतरी इसी का संकेत दे रही है।
मगर इस अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के सामने अब भी कई चुनौतियां हैं। अग्रिम निर्णय प्राधिकरण (एएआर) के विरोधाभासी आदेश, अपील से जुड़ा ढांचा तैयार होने में देरी और कर संबंधी बढ़ते विवाद जीएसटी प्रणाली की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
कर राजस्व बढ़ने के साथ ही जीएसटी में अगले चरण सुधार या जीएसटी 2.0 की तरफ बढ़ने की जरूरत महसूस होने लगी है। मगर दरें तर्कसंगत बनाने और पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने से जुड़े सुधारों थोड़ी देर हो सकती है।
जीएसटी प्रणाली प्रभाव में आने के पहले वर्ष 2017-18 (जुलाई-मार्च) में औसत मासिक संग्रह 90,000 करोड़ रुपये था, मगर बाद में यह आंकड़ा बढ़ता गया। वर्ष 2023-24 में औसत मासिक संग्रह 87 फीसदी की भारी भरकम बढ़ोतरी के साथ 1.68 लाख करोड़ रुपये हो गया।
Diese Geschichte stammt aus der June 28, 2024-Ausgabe von Business Standard - Hindi.
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