![व्यापारिक बीज उत्पादन उभरता व्यवसाय... व्यापारिक बीज उत्पादन उभरता व्यवसाय...](https://cdn.magzter.com/1344336963/1696314141/articles/WfU1Yb65s1696502978581/1696503296526.jpg)
भारत की आर्थिकता का मुख्य केन्द्र कृषि है (जो कि देश की कुल आमदनी में पांचवां हिस्सा योगदान देती है) और खुशहाल कृषि का केन्द्र प्रमाणित/सर्टीफाईड बीज हैं। कृषि में आई हरित क्रांति के कारण संपूर्ण देश अन्न उत्पादन में स्वैःनिर्भर बना, जिसमें अच्छे बीजों ने भी योगदान डाला। इसके बाद सर्टीफाईड बीजों की खपत में निरंतर इजाफा होता गया।
भारतीय बीज उद्योग विश्व का आठवां सबसे बड़ा उद्योग है। यह कारोबार तकरीबन 4.1 बिलीयन भारतीय रूपये तक का है। यह उद्योग 15 प्रतिशत की वार्षिक दर पर विकास कर रहा है। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 तक इस उद्योग की 9.1 बिलीयन यू.एस. डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। निजी बीज उद्योग का विकास सिर्फ बीज उत्पादन एवं मार्केटिंग तक ही सीमित नहीं रह गया है बल्कि इस उद्योग ने नई तकनीकों को अपनाकर भविष्य की अन्य जरूरतों की पूर्ति के लिए शक्ति भी प्राप्त कर ली है।
यदि हम उत्पादन क्षमता की ओर दृष्टि डालें तो हम देखते हैं कि भारत में 70 प्रतिशत बीज किसानों की ओर से अपने निजी क्षेत्रों से लिए जाते हैं। 26 प्रतिशत सरकारी कृषि अदारों से आता है और सिर्फ 4 प्रतिशत खोज केन्द्रों की ओर से विकसित किया गया हाइब्रिड बीज का प्रयोग किया जाता है।
भारत की घरेलू हाइब्रिड बीज मार्किट 4.9 बिलीयन रूपये की है। यह वार्षिक 13 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। यदि हम इसकी तुलना विश्व बीज मार्किट के साथ करें तो हम देखते हैं कि विश्व विकास दर 5 प्रतिशत है। भारत में बड़े बीज उत्पादक जैसे कि मोंसैंटो इंडिया एवं सिंर्जेंटा इंडिया हाइब्रिड बीज के बड़े केन्द्र बिन्दू हैं। आधुनिक समय में किसानों में उच्च गुणवत्ता एवं उत्पादन वाले बीजों के बारे में जागरूकता बढ़ रही है। किसानों का रूझान हाइब्रिड बीजों की ओर बढ़ रहा है। बीज उद्योग में पहले सरकारी कंपनियों का दबदबा था परन्तु 1988 से नई बीज पॉलिसी के लागू होने से निजी क्षेत्र की बीज कंपनियों ने बीज विकास एवं बाजारीकरण में अहम हिस्सा डालना शुरू कर दिया है। सरकार के बायोटैक्नोलॉजी को अपनाने के निर्णय ने बहुत सारी बहु-राष्ट्रीय बीज कंपनियों को भारत में कार्य करने के लिए आकर्षित किया है। इस समय बीज क्षेत्र में निजी एवं सार्वजनिक बीज कंपनियों का अनुपात 60:40 हो गया है।
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![भूमि सुधार के लिए प्रयासों की आवश्यकता... भूमि सुधार के लिए प्रयासों की आवश्यकता...](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/1183/1996499/gJ7a4gxAT1739793975576/1739794973758.jpg)
भूमि सुधार के लिए प्रयासों की आवश्यकता...
\"यदि पृथ्वी बीमार है तो यह लगभग निश्चित है तो हमारा जीवन भी बीमार है। यदि हम मनुष्य के अच्छे जीवन व स्वास्थ्य की कामना करते हैं तो यह बहुत आवश्यक है कि भूमि के स्वास्थ्य को ठीक करना भी बहुत आवश्यक है, मॉडर्न तकनीकों ने भूमि के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाला है। इस पृथ्वी पर जैसा भी जीवन है यद्यपि स्वस्थ है या अस्वस्थ है यह भूमि की उपजाऊ शक्ति/अर्थात भूमि के स्वास्थ्य पर ही निर्भर करता है क्योंकि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर भोजन पदार्थ धरती में से ही आ रहे हैं। प्रसिद्ध विज्ञानी कारले इस लक्ष्य पर पहुंचा कि कैमिकल फर्टीलाइज़र भूमि के स्वास्थ्य को रासायनिक खादें सुरक्षित नहीं रख सकते। यह रसायन भोजन अथवा भूमि में स्थिर हो जाते हैं सिर्फ कार्बनिक पदार्थ ही भूमि के स्वास्थ्य को बरकरार रख सकते हैं।\"
![बजट 2025-26 में कृषि क्षेत्र को क्या मिला? बजट 2025-26 में कृषि क्षेत्र को क्या मिला?](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/1183/1996499/cflbvMwl-1739792128662/1739792332361.jpg)
बजट 2025-26 में कृषि क्षेत्र को क्या मिला?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2025 को अपने बहुप्रतीक्षित बजट भाषण में कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने इस क्षेत्र के लिए कम से कम नौ नए मिशन या कार्यक्रमों की घोषणा की और भारत को \"विश्व का खाद्य भंडार\" बनाने में किसानों की भूमिका को स्वीकार किया।
![आंवला की खेती की उत्तम पैदावार कैसे प्राप्त करें? आंवला की खेती की उत्तम पैदावार कैसे प्राप्त करें?](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/1183/1996499/uF71eq31W1739795002943/1739795615768.jpg)
आंवला की खेती की उत्तम पैदावार कैसे प्राप्त करें?
आंवला एक महत्वपूर्ण व्यापारिक महत्व का फल वृक्ष है। औषधीय गुण व पोषक तत्वों से भरपूर आंवले के फल प्रकृति की एक अभूतपूर्व देन है। इसका वानस्पतिक नाम एम्बलिका ओफीसीनेलिस है।
![जल चक्र में बढ़ रहा है मानवीय हस्तक्षेप जल चक्र में बढ़ रहा है मानवीय हस्तक्षेप](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/1183/1996499/bGzMHO3g21739792613249/1739792715291.jpg)
जल चक्र में बढ़ रहा है मानवीय हस्तक्षेप
नासा के वैज्ञानिकों ने लगभग 20 सालों का अवलोकन करके पाया कि दुनिया भर में जल चक्र तेजी से बदल रहा है। इनमें से अधिकांश खेती जैसी गतिविधियों के कारण हैं, इनका कुछ इलाकों में पारिस्थितिकी तंत्र और जल प्रबंधन पर प्रभाव पड़ सकता है।
![कृषि क्षेत्र में बढ़ा रोजगार कृषि क्षेत्र में बढ़ा रोजगार](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/1183/1996499/zxaRA7qF-1739792348948/1739792458659.jpg)
कृषि क्षेत्र में बढ़ा रोजगार
आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में भले ही रोजगार की उजली तस्वीर पेश की गई है, लेकिन इसने सेवा और निर्माण क्षेत्र में रोजगार घटने और कृषि क्षेत्र में रोजगार बढ़ने की बात कर यह साबित कर दिया है। कि सरकार कृषि क्षेत्र के रोजगार को दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरित करने में विफल साबित हुई है।
![गेहूं फसल की सिंचाई कब और कैसे करें? गेहूं फसल की सिंचाई कब और कैसे करें?](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/1183/1996499/_KdERQO8V1739792944864/1739793381693.jpg)
गेहूं फसल की सिंचाई कब और कैसे करें?
भारत में गेहूं की फसल शरद ऋतु में उगाई जाती है जो कि लगभग 130 दिन का फसल चक्र पूरा करती है। असिंचित क्षेत्रों में गेहूं की फसलावधि मध्य अक्टूबर से मार्च माह के बीच होती है और सिंचित क्षेत्रों में यह अवधि मध्य नवम्बर से मार्च से अप्रैल के बीच होती है। भारत में गेहूं की फसल मुख्य रुप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र राज्यों में होती है।
![पशुओं में खनिज मिश्रण का महत्व पशुओं में खनिज मिश्रण का महत्व](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/1183/1996499/HbWtREl3j1739795663249/1739795968901.jpg)
पशुओं में खनिज मिश्रण का महत्व
शरीर की प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। इसके सही संतुलन से विशेष प्रकार की बिमारियों से बचा जा सकता है।
![फसल की उपज में वृद्धि के लिए नाइट्रोजन उपयोग में सुधार का नया तरीका फसल की उपज में वृद्धि के लिए नाइट्रोजन उपयोग में सुधार का नया तरीका](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/1183/1996499/4a725btXc1739792465599/1739792600239.jpg)
फसल की उपज में वृद्धि के लिए नाइट्रोजन उपयोग में सुधार का नया तरीका
एक नए शोध में दिखाया गया है कि पौधों में नाइट्रिक ऑक्साइड (एनओ) के स्तर को कम करने से धान की फसल और अरेबिडोप्सिस में नाइट्रोजन अवशोषण और नाइट्रोजन के सही उपयोग या नाइट्रोजन यूज एफिशिएंसी (एनयूई) में बहुत ज्यादा सुधार हो सकता है।
![जितना प्राकृतिक खेती पर जोर, उतना बजट नहीं .. जितना प्राकृतिक खेती पर जोर, उतना बजट नहीं ..](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/1183/1996499/KWLYeQZqG1739792064930/1739792121321.jpg)
जितना प्राकृतिक खेती पर जोर, उतना बजट नहीं ..
पिछले कुछ वर्षों से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की खूब बातें हो रही हैं। केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती पर काफी जोर दे रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों के बजट के आंकड़े देश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के मामले में खास उत्साहजनक नजर नहीं आते।
![वैज्ञानिक विधि से भिंडी उत्पादन की उन्नत खेती वैज्ञानिक विधि से भिंडी उत्पादन की उन्नत खेती](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/1183/1996499/44qWsj-c41739793690363/1739793937678.jpg)
वैज्ञानिक विधि से भिंडी उत्पादन की उन्नत खेती
परिचय : भिंडी सबसे लोकप्रिय सब्जियों में से एक है, जिसे लोग लेडीज़ फिंगर या ओकरा के नाम से भी जानते हैं। भिंडी का वैज्ञानिक नाम एबेलमोलकस एस्कुलेंटस (Abelmoschus esculentus L.), कुल / परिवार मालवेसी तथा उत्पत्ति स्थान दक्षिणी अफ्रीका अथवा एशिया माना जाता हैं।