"सपने वो नहीं होते, जो नींद में देखे जाते हैं, सपने वो होते हैं, जो आपको सोने नहीं देते हैं।" यह प्रसिद्ध कथन भारत के 'मिसाइल मैन' एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का है, जो दुनिया के लाखों-करोड़ों लोगों को आज भी प्रेरणा देता है। यह केवल एक कथन नहीं है, बल्कि एक विचार है, जिसने लोगों को जिंदगी में नए सपने बुनने के लिए एक ऊंची उड़ान दी। इस कथन का सीधा सा मतलब है कि जीवन को लेकर आपके ऐसे सपने होने चाहिए, जिन्हें पाने के लिए आप पूरी जी-जान लगा दें और तब तक प्रयास करती रहें, जब तक उनको पा न लें।
लेकिन नेहा की मां कुछ अलग ही सोच रखती हैं। "तुम्हें कॅरिअर के बारे में सोचने की क्या जरूरत है, शादी के बाद पति के सपने ही पत्नी के सपने बन जाते हैं। महिलाओं के सपने कभी भी परिवार से बड़े नहीं होने चाहिए।" अपनी मां के मुंह से यह शब्द सुनते ही नेहा ने कहा, "यह क्या कह रही हो आप, मम्मी? हर महिला के लिए यह जरूरी है कि वह अपने सपने खुद चुनें, न कि किसी और के सपने उसके सपने हों और वह किसी के दबाव में उन्हें चुनने को मजबूर न हो। हर किसी को अपने सपने देखने का अधिकार है।"
असल में बिल्कुल सही कहा नेहा ने, क्योंकि अक्सर माता-पिता, पति और रिश्तेदार दुनियादारी की पाठशाला में बच्चियों, युवतियों और महिलाओं को यही पाठ पढ़ाते हैं। लेकिन इन बातों के आगे हर महिला के लिए एक खुला संसार है, जहां वह अपने सपने देखने और उन्हें सच करने के लिए आजाद है। बस जरूरत है तो पूरी हिम्मत और विश्वास के साथ कदम आगे बढ़ाने, सपने देखने और उन्हें सच करने की जिद रखने की।
सपने आपके दिल की सच्चाई होते हैं। इसलिए जिस दिन आप अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेंगी, उस दिन दुनिया आपको मान जाएगी।
■ सोचो कुछ बड़ा
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