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
युवा वर्ग एवं भविष्य के लिए नई दृष्टि
अकसर यह कहा जाता है कि ' भारत का युवा वर्ग राह खो बैठा है। ' वस्तुस्थिति , यद्यपि यह है कि भारत का युवा वर्ग देखता है, जानता है कि जिस राह पर वह खड़ा है वह सरासर गलत है। परंतु विडंबना यह है कि क्या गलत है और क्यों गलत है उसे वह ठीक से बता नहीं पाता है, समझा नहीं पाता है।

चिरागों की तरह जलती हुई ओशो की आंखें
1964 में मैं जबलपुर आया हुआ था, महाराष्ट्र सरकार की ड्रॉइंग की एक परीक्षा देने के लिए जो मुंबई के सर जे जे इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड आर्ट्स में दाखिले के लिए जरूरी थी। अपने एक सम्बंधी के यहां ठहरा हुआ था।
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मुझे कभी मृत मत समझना मैं सदा वर्तमान हूं
ओशो ने मृत्यु को उसी सहजता और हर्ष से वरण किया था जिस प्रकार से एक आम व्यक्ति जीवन को करता है। उन्होंने जगत को यही संदेश दिया कि मृत्यु के प्रति सदा जागरूक रहो, उसे वरण करो । आज ओशो भले ही अपना शरीर छोड़ चुके हों लेकिन अपने विचारों के माध्यम से वो आज विश्व में कहीं ज्यादा विस्तृत, विशाल रूप से मौजूद हैं।
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मा आनंद शीला के भारत आगमन का अर्थ
34 वर्ष बाद मा आनंद शीला अपने देश भारत आई तो वह आते ही मीडिया-जगत पर छा गई। यह होना स्वाभाविक था क्योंकि एक वर्ष पहले ही ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवा नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई 'वाइल्ड वाइल्ड कंट्री' ने 6 किश्तों में मुख्यतःशीला को केंद्र पर रखा था ।
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महावीर को समझना हो तो ओशो को पढ़ो
प्रस्तुत आलेख श्री विकसित जैन मुनि के साक्षात्कार पर आधारित है । आइए , जानते हैं कि ओशो इस व्यक्ति के जीवन में कितने भीतर तक समाये हैं । इनका अद्भुत व्यक्तित्व जानकर निश्चित ही आप विस्मय से भर जाएंगे
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प्रेम और विवाह
जिसके जीवन में प्रेम की कोई झलक नहीं है, उसके जीवन में परमात्मा के आने की कोई संभावना नहीं है। प्रेम के अतिरिक्त कोई रास्ता प्रभु तक नहीं पहुंच सकता।
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नानक का धर्म नवीनतम है
नानक की 550 वीं जयंती एवं प्रकाश उत्सव पर प्रस्तुत है ओशो का विशेष प्रवचन जो उनकी 'एक ओंकार सतनाम' नामक पुस्तक में संकलित है ।
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थैलियम की बूंदे
रोनाल्ड रीगन प्रशासन ने जब अपनी रूढ़िवादी, ईसाई नीतियों के प्रवाह में ओशो को अक्टूबर 1985 में अकारण गिरफ्तार किया तब किसे पता था कि सदियों पूर्व सुकरात को दिए गए जहर की घटना पुनः दोहराई जा रही थी। प्रस्तुत है ओशो रजनीश को जहर दिए जाने की इस घटना का एक शोधपूर्ण विवरण लेखिका सू एपलटन की कलम से।
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ओशो ने दुनिया को हास्य से भर दिया
ओशो ने आधुनिक मनुष्य को हंसता, नाचता, गाता धर्म दिया। रोती बिलरवती तनावग्रस्त दुनिया को ठहाकों से भर दिया।
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ओशो का वैज्ञानिक चिंतन
ओशो द्वारा दिए गए प्रवचन लगभग 650 हिंदी अंग्रेजी पुस्तकों में आबद्ध हैं। अब जबकि ओशो को दुनिया भर में स्वीकार किया जा चुका है, यह प्रासंगिक ही है कि उनकी विचार सरणी के उद्देश्य, महत्त्व, सार्थकता, वैज्ञानिक पक्ष आदि बिंदुओं को निष्पक्ष और स्पष्ट दृष्टिकोण से उकेरा जाए।
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रामकृष्ण परमहंस- ईश्वरीय चेतना एवं धार्मिक सौहार्द के प्रवर्तक
महान संत, साधक, विचारक एवं सभी धर्मों की एकता पर बल देने वाले आध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण परमहंस भारत की 19वीं शताब्दी के प्रमुख संतों में से एक हैं। मां काली के अनन्य भक्त श्री रामकृष्ण का मानना था कि धर्म अलग-अलग रास्ते हैं लेकिन ये सभी एक ही लक्ष्य तक लेकर जाते हैं।
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मिजोरम की संस्कृति को जानें 'चपचार कुट के जरिए
उत्तर पूर्व भारत आज भी पूरी दुनिया के लिए एक पहेली की तरह है, पर्वतीय इलाकों में हरे-भरे जंगलों के पास, प्रदूषण और शोर-शराबे से दूर भारत का यह हिस्सा दुनिया के सबसे सुंदर स्थानों में से एक है। और यहीं है भारत का एक छोटा सा राज्य मिजोरम जिसकी जनसंख्या केवल 12 लारव है और जिसका अधिकतर भूभाग आज भी वन्य सम्पदा को समर्पित है। इसी मिजोरम में मार्च के महीने में राज्य के प्रमुरव उत्सवों में से एक 'चपचार कुट' मनाया जाता है। चलिए चपचार कुट के बहाने मिजोरम की संस्कृति के थोड़ा और करीब चलते हैं।
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बीसवीं सदी का अप्रतिहत व्यक्तित्व
एक परमार्थ चेता संतहमारा देश धर्म प्रधान है। इसमें अनेक पंथ हैं, अनेक ग्रंथ हैं, अनेक साधना पद्धतियां हैं, अनेक धर्म प्रवक्ता और प्रशिक्षक हैं। समस्या है, हम कहां-कहां जाएं? सन् 1983 गुजरात यात्रा के दौरान एक प्रसिद्ध चिकित्सक ने आचार्यश्री महाप्रज्ञ से उक्त प्रश्न पूछा।
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बांग्लादेश में भी देवी आराधना के हैं सब रंग
हिंदुस्तान के नक्शे पर सन् 1947 तक एकजुट रहा बांग्लादेश आज विश्व मानचित्र पर तो अलग है, लेकिन बात अगर हिंदू धर्म और आस्था की हो, तो यहां अल्पसंख्यक हिंदुओं में भी आस्था और भक्ति के वे सब रंग मौजूद हैं, जो हिंदुस्तान के हिंदुओं में हैं और यह सिद्ध करता है बांग्लादेश का ढाकेश्वरी मंदिर।
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रूप-लावण्य के प्रति सजगता भी जरूरी
स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए आपकी जीवनशैली और रवान-पान काफी महत्त्व ररवता है । कुछ छोटे- मोटे उपायों को अपनाकर आप भी पा सकते हैं स्वस्थ एवं सुंदर शरीर। और ऐसे ही कुछ सुझाव शामिल हैं इस लेव में।
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वसंत ऋतु में कैसे रहें नीरोग?
मौसम के अनुकूल भोजन हमारे तन-मन दोनों के लिए स्वास्थ्यप्रद है तो भला वसंत जैसे मनमोहक ऋतु में हम अपने रवान-पान से समझौता क्यों करें! इस मौसम में भी हमारा आहार कुछ ऐसा हो कि स्वास्थ्य एवं स्वाद दोनों का सामंजस्य बना रहे।
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शिव का आभूषण है नाग
भगवान शिव के मस्तिष्क पर चन्द्रमा जटाओं में गंगा तो गले में सदैव नाग विद्यमान रहता है। शिव के गले में नाग की क्या महत्ता है आइए जानते हैं।
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शिवः विध्वंसक भी रक्षक भी
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि एक महत्त्वपूर्ण पर्व है, पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन महादेव के विशालतम स्वरूप अग्निलिंग से सृष्टि का उदय हुआ था।
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संन्यासियों का क्या धर्म है
यह अपने मन में निश्चित जाने कि दण्ड, कमण्डलु और काषायवस्त्र आदि चिह्न धारण धर्म का कारण नहीं है, सब मनुष्यादि प्राणियों की सत्योपदेश और विद्यादान से उन्नति करना संन्यासी का मुख्य कर्म है।
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सपने मार्गदर्शक हैं अपने
मनुष्य गहरी नींद में सूक्ष्माकार होकर अपने भूत और भविष्य से संपर्क स्थापित करता है। यही संपर्क स्वप्न का कारण और स्वप्न का माध्यम बनता है। स्वप्न के मूल में हमारे जीवन में घटित घटनाएं होती हैं। सभी प्राणियों में मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो स्वप्न देरव सकता है । जानते हैं इन सपनों का रहस्य इस आलेख से।
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प्रज्ञापुरुष आचार्य महाप्रज्ञ
महाप्रज्ञ शब्द सामने आते ही एक | जिज्ञासा उभरती है कि महाप्रज्ञ कौन हो सकता है? यदा कदा 'महाप्रज्ञ' की शाब्दिक और आर्थी मीमांसा का प्रयत्न करती रहती हूं । शब्द और अर्थ मीमांसा के क्षणों में मुझे यह अनुभव होता है कि' महाप्रज्ञ' शब्द में एक शक्ति है, एक अर्थगांभीर्य है, प्राणवत्ता और गुणवत्ता है, उदात्त चेतना का अवबोध है, आध्यात्मिक ऊर्ध्वारोहण का संबोध है ।
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दूसरों के लिए जीने में भी आनंद है
जब कोई व्यक्ति दूसरों का ध्यान रख कर पहले उनके बारे में सोचता है, तो उसके भीतर एक अद्भुत भावना उत्पन्न होती है। जैसे ही आप किसी और के बारे में सोचते हैं, तो न केवल वह व्यक्ति आपके प्रति सोचता है बल्कि ईश्वर भी आपके लिए सोचते हैं।
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ताज महल से कम सुंदर नहीं ताज महोत्सव
देश की ऐतिहासिक धरोहर और दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताज महल दुनिया भर में प्रसिद्ध है। प्रेम की मिसाल, हस्तशिल्प-कारीगरी का बेहतरीन नमूनों में ताज महल का नाम आता है। और यह रखूबसूरती दोगुनी हो जाती है जब आयोजन होता है ताज महोत्सव का।
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जीवन में राग रंग का मेल है होली
"होली वास्तव में बसंत उत्सव श्रृंखला की पूर्णता का प्रतीक उत्सव है। होली का एक ही अर्थ है राग और रंग अर्थात् संगीत के उन सातों स्वरों का सान्निध्य जिनके बिना प्रकृति भी नहीं रह सकती और रंग अर्थात प्रकृति का सर्वाधिक मोहक स्वरूप।"

जिन्होंने बदल दिया शहादत के मायने...
23 मार्च 1931, भारत में दमनकारी ब्रिटिश हुकूमत के विरोध में उठे तीन क्रांतिकारियों को फांसी दी गई। इस दिन से पहले तक इन तीनों युवाओं भगत सिंह, शिवराम राजगुरू और सुरवदेव थापर को केवल भारत के लोग जानते थे। लेकिन फांसी के बाद ये तीनों विश्व भर में क्रांति के प्रतीक बन गए।

चलो बरसाने खेलैं होरी...
ब्रज के बरसाना गांव की लट्ठमार होली की मस्ती राधा-कृष्ण की भक्ति के रंग में भी रंगी होती है। यहां की होली में प्रमुरव रूप से नंदगांव के पुरुष और बरसाने की महिलाएं शामिल होती हैं। जब नंदगांव के पुरुषों की टोली रंग रवेलने पिचकारियां लेकर बरसाना पहुंचती हैं तो यहां की महिलाएं उनपर जमकर लाठियां बरसाती हैं, लेकिन फिर भी यह द्वेष का नहीं प्रेम और मस्ती का रंग होता है।

ग्रामीण भारत की महिलाओं के साहस को सलाम
भारत की आधी आबादी आज अपने हाथों अपनी किस्मत लिरव रही है, अपनी दुनिया बदल रही है और देश एवं समाज को तरक्की की राह दिरवा रही है और इसमें ग्रामीण महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। तो मिलते हैं कुछ ऐसी ही ग्रामीण नायिकाओं से जिन्होंने अर्थिक अभावों में भी संभावनाओं को तलाश लिया।
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ओशो का इंद्रधनुषी अध्यात्म: मायाजाल या समाधान
स्वामी अंतर जगदीश कई वर्षों से ओशो के अनुयायी हैं और ध्यान शिविरों का आयोजन करते रहे हैं । प्रस्तुत है उनसे साक्षात्कार के प्रमुख अंश ।
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ओशो हैं इक प्यार का सागर
स्वामी ईशान महेश आध्यात्मिक उपन्यासकार एवं शिक्षक हैं । अपनी ध्यान-यात्रा में जाने का श्रेय वे ओशो के अंतरंग शिष्यों को देते हैं। प्रस्तुत है ओशो के प्रति स्वामी ईशान महेश का दृष्टिकोण।
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खान-पान पर हो ध्यान तो जीवन हो आसान
खान-पान मानव जीवन का एक अहम हिस्सा है। अगर अच्छा स्वास्थ्य पाना है तो हमारा आहार कुछ इस तरह होना चाहिए कि उससे हमारी पाचन व्यवस्था प्रभावित न हो।