रिश्ता कोई भी हो, कैसा भी हो, जब तक दोनों पक्ष एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़े नहीं होते, वह रिश्ता भीतर से खोखला ही रहता है। वो कहते हैं ना, जब तक मन नहीं जुड़ता, तब तक रिश्ता नहीं फलता-फूलता। बिना भावनात्मक मजबूती के आपका रिश्ता उस मुकाम तक पहुंच ही नहीं सकता, जिसकी आप अपेक्षा कर रहे हैं। कई दफा इस भावनात्मक मजबूती के लिए किसी भी पक्ष को कोशिश करने की जरूरत नहीं पड़ती। यह बहुत स्वाभाविक रूप से अपने-आप हो जाता है। पर, कई बार एक पक्ष जब भावनात्मक रूप से रिश्ते से जुड़ा नहीं होता, तो रिश्ता खराब होने लगता है। कई बार सालों लंबे रिश्ते में दिन का बड़ा हिस्सा साथ बिताने के बाद भी ऐसा लगता है कि भावनात्मक तौर पर पार्टनर से दूरी है। अधिकतर लोग इस बात की पहचान ही नहीं कर पाते हैं और सोचते हैं कि वक्त के साथ सब कुछ सही हो जाएगा। पर, होता है ठीक इसका उल्टा! अगर सही समय पर इस समस्या को दुरुस्त न किया जाए तो रिश्ते में धीरे-धीरे कड़वाहट आने लगती है। इस समस्या का समाधान कैसे किया जाए, आइए जानें:
खुद के बारे में क्या है राय?
रिश्ते को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाना चाहते हैं तो सबसे पहले खुद के बारे में अपनी राय स्पष्ट कर लें। आप इस रिश्ते में खुद को किस मुकाम पर देखते हैं ? इस सवाल के जवाब पर ही आपके रिश्ते का भविष्य निर्भर है। क्या आपको लगता है कि आप अपने साथी पर विश्वास नहीं कर सकते? क्या आपको लगता है कि इससे बेहतर व्यक्ति के साथ आपको जिंदगी बितानी चाहिए? आपको सबसे पहले इस सवाल का जवाब तलाशना होगा कि किन कारणों से आप इस रिश्ते में कमतर महसूस करते हैं? क्यों इस रिश्ते में वैसा प्यार व विश्वास आप महसूस नहीं कर पाते जिसके आप हकदार हैं? इन सवालों के जवाब से आपको समस्या के मूल कारणों की जानकारी मिल सकेगी।
दोनों की भावनाएं हैं महत्वपूर्ण
आपको यह समझना होगा कि रिश्ते में दोनों ही पक्षों की भावनाएं मायने रखती हैं। जितना आप अपनी भावनाओं की कद्र करते हैं, उतनी ही अहमियत साथी की भावनाओं को भी दें। सामने वाले की भावनाओं को खारिज ना करें। साथी की भावनाओं के प्रति सहानुभूति भरा रवैया अपनाएं, फिर चाहे वह आपकी भावनाओं से अलग क्यों ना हो।
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