राजनीति जिस मोड़ से गुजरी है, खासकर उत्तर प्रदेश में, उसके बाद कई प्रश्न विचार के इंतजार में पंक्ति बनाकर खड़े हो गए हैं। इनमें से कई महामारी के शून्य में डूब गए थे। इतना गहरे कि फिर सतह पर नहीं आ सके। ऐसा ही एक प्रश्न था हिंदी में जगह पहले भी कम थी, इधर के राजनैतिक दौर में और घट गई। बहस का चलन एकाएक कमजोर पड़ गया। जरूर इसमें टेक्नोलॉजी का भी योगदान है। इंटरनेट से मिली सुविधाओं ने एक नए समाज को जन्म दिया, जो खुद को सोशल मीडिया कहता है और विचार-विमर्श का प्रतिनिधि माध्यम मानता है। अगर आप उसके प्रतिभागी नहीं हैं, तो वह आपको हाशियावासी मानने में संकोच नहीं करता। इस तर्क से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हाशिये पर हिंदी समाज के लाखों, करोड़ों लोग रहते हैं, जो कभी अखबारों और पत्रिकाओं की बहस के करीब आने लगे थे, अब दूर छिटक गए हैं।
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माघशीर्ष का संगीत महोत्सव
तमिलनाडु की राजधानी में हजारों साल पुरानी संगीत की विरासत को सहेजने का अनूठा जश्न
भोपाल का विष पीथमपुर को
चालीस साल पहले हुए हादसे का जहरीला कचरा जलाने की कवायद एक बार फिर खटाई में
सुनहरे कल के नए सितारे
हर मैदान में नई-नई, कच्ची उम्र की भी, प्रतिभाओं की चमक चकाचौंध कर रही है और खुद में ऐसे बेमिसाल भरोसे की गूंज भारतीय खेलों की नई पहचान बन गई है, भारतीय खेलों से हर पल जुड़ती कामयाबी की नई कहानियां इसका आईना हैं
वोट के बाद नोट का मोर्चा
चुनाव के बाद अब बकाये पर केंद्र से हेमंत की रार, लाभकारी योजनाओं का बोझ पड़ रहा भारी
काशी
नीलकंठ की नगरी - काशी, अनादि और अनंत काल का प्रतीक रही है। कथाएं प्रचलित हैं कि पिनाकधारी, नीलकंठ शिव को यह नगरी अतिप्रिय है। मान्यता है कि यहां मां पार्वती संग शिव रमण और विहार किया करते हैं। काशी का बाशिंदा हो या यहां आने वाला भक्त, हर सनातनी जीवन में एक बार काशी की भूमि को स्पर्श करना चाहता है।
कांग्रेस का संगठन-संकट
हुड्डा विहीन रणनीति और पुनर्निर्माण की चुनौती के साथ स्थानीय निकाय चुनावों की परीक्षा सामने
दस साल की बादशाहत खत्म
तमाम अवसरों के बाद भी भारतीय क्रिकेट टीम महत्वपूर्ण खिताब बचाने से चूक गई
पीके की पींगें
बीपीएससी परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के आरोप में युवाओं के आंदोलन में प्रशांत किशोर की शिरकत के सियासी मायने
सरे आसमान रोशन प्रतिभाएं
हर खेल के मैदान में दुनिया में देश का झंडा लहरा रहे नए-नए लड़के-लड़कियां अपने ज्बे और जुनून से तस्वीर बदल रहे हैं, ऐसे 11 सितारों पर एक नजर
संगम में निराला समागम
सदियों से हर बारह वर्ष पर लगने वाला दुनिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक मेले के रंग निराले