अनाज का दान और पकते पकवान
Rupayan|April 12, 2024
बैसाखी पर्व की एक अलग ही लय है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व की रस्में भी बदल जाती हैं, लेकिन क्षेत्र कोई भी हो, बैसाखी पर पकते पकवानों की खुशबू का कहना ही क्या!
सरिता खुराना
अनाज का दान और पकते पकवान

भारतीय त्योहार हमें संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिकता की एक चमकदार झलक दिखाते हैं, जो कि नियमित अंतराल पर होते हैं और जीवन की एकरसता को तोड़ने में मदद करते हैं। ये आपको जीवन की छोटी और बड़ी चीजों का जश्न मनाने का मौका देते हैं और समुदायों में शांति एवं आनंद के वाहक बनते हैं। 

बैसाखी पर्व भी ऐसे ही आनंद से भर देने वाला त्योहार है। बैसाखी पर्व उतर भारत में वैशाख महीने की पहली तारीख यानी 13 या 14 अप्रैल को बड़ी धूमधाम से मनाया जाने वाला त्योहार है। बैसाखी मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाई जाती है, जो कि मूलतः कृषि आधारित राज्य हैं। इस त्योहार को सिख नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। यह कई अन्य राज्यों में भी यह नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। इसे बंगाल में पोइला बैसाख, असम में बिहू, तमिलनाडु में पुथांडु, केरल में विशु और बिहार में सत्तू संक्रांति नाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग अच्छी फसल की प्रार्थना करते हैं, जरूरतमंदों के बीच प्रसाद वितरित करते हैं, विभिन्न अनुष्ठान एवं पूजा-पाठ करते हैं और गीत-संगीत एवं भांगड़ा पर थिरककर इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। बैसाखी का यह पर्व इसलिए भी भारतीय परिवारों में खास माना जाता है, क्योंकि इस दिन कई पारंपरिक व्यंजन और तरह-तरह की स्वादिष्ट मिठाइयां तैयार की जाती हैं, जिनको पूरा परिवार साथ मिलकर खाता है।

Denne historien er fra April 12, 2024-utgaven av Rupayan.

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