![पेरैंटल बर्नआउट इमोशनल कंडीशन पेरैंटल बर्नआउट इमोशनल कंडीशन](https://cdn.magzter.com/1338812051/1735122792/articles/a2s27DTAE1735294464769/1735294708135.jpg)
हम बच्चों को अपने जीवन का मोहरा बना लेते हैं. लगता है कि हर कोई हमारे बच्चे की तारीफ करे. पेरेंट्स खुद दूसरों से कहते हैं कि मेरी तरफ देखो, क्या नायाब चीज है मेरा बच्चा, मेरा बच्चा आईपीएल में गया है, स्कूल की तरफ से बाहर गया है, वह स्विमिंग चैंपियन बन गया है. यानी आज पेरैंट्स चाहते हैं कि उन का बच्चा पढ़ाई के साथसाथ ड्राइंग, पेंटिंग, डांस, सिंगिंग, क्राफ्ट, स्पोट्र्स आदि में भी सब से आगे रहे. इस सब के चलते मातापिता पेरैंटल बर्नआउट की गिरफ्त में आ जाते हैं.
यह आप को उलटवार करता है. बच्चे के बारे में आप सोसाइटी में इतनी बातें करते हैं कि एक दिन वह बच्चा आप के गले की फांस बन जाता है. दूसरे शब्दों में कहें तो वह गले की ऐसी हड्डी बन जाता है जो न निगलते बने न उगलते. दरअसल बच्चे की तारीफ इतनी ज्यादा कर दी जाती है सोसाइटी में कि उसे मैनेज करना एक चैलेंज बन जाता है.
बच्चा है कि आप की अब एक नहीं सुनता, आप पर दबाव बढ़ता ही जा रहा है. इसलिए बच्चे की नैचुरल ग्रोथ होने दो. उस को खादपानी दो लेकिन अपने को उस पर न्योछावर मत करो. बच्चों के लिए उतना करो जितना जेब इजाजत करे. बच्चों के लिए खुद को पूरी तरह न थकाएं. अगर आप भी अपने बच्चों की देखभाल और पालनपोषण के दौरान थकान व तनाव का अनुभव करते हैं, अपने बच्चों की जिम्मेदारियों व अपेक्षाओं के बीच संतुलन नहीं बना पाते हैं और आप को पर्याप्त आराम व सपोर्ट नहीं मिल पाता है तो समझिए की कमी खुद में ही है. आइए जानें इस सिचुएशन को कैसे हैंडल करें.
बच्चों को न कहना भी सीखे मां
This story is from the December Second 2024 edition of Sarita.
Start your 7-day Magzter GOLD free trial to access thousands of curated premium stories, and 9,000+ magazines and newspapers.
Already a subscriber ? Sign In
This story is from the December Second 2024 edition of Sarita.
Start your 7-day Magzter GOLD free trial to access thousands of curated premium stories, and 9,000+ magazines and newspapers.
Already a subscriber? Sign In
![ऊंचे ओहदे वालों में अकड़ क्यों ऊंचे ओहदे वालों में अकड़ क्यों](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/871/1971251/jsAA7PQtH1737712505485/1737712993859.jpg)
ऊंचे ओहदे वालों में अकड़ क्यों
कुछ लोगों में अपने रुतबे को ले कर अहंकार होता है. उन्हें लगता है कि उन का ओहदा, उन का पद बैस्ट है. वे सुपीरियर हैं. यह सोच अहंकार और ईगो लाती है जो इंसान के व्यवहार में अड़चन डालती है.
![बंटोगे तो कटोगे वाला नारा प्रधान राष्ट्र बंटोगे तो कटोगे वाला नारा प्रधान राष्ट्र](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/871/1971251/igzsVRgNl1737713300356/1737713410810.jpg)
बंटोगे तो कटोगे वाला नारा प्रधान राष्ट्र
देश नारा प्रधान है. काम भले कुछ न हो रहा हो पर पार्टियां और सरकारों द्वारा उछाले नारों की खुमारी जनता पर खूब छाई रहती है.
![बुलडोजर न्याय औरत विरोधी बुलडोजर न्याय औरत विरोधी](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/871/1971251/Ro1JWIWT41737703976070/1737706073945.jpg)
बुलडोजर न्याय औरत विरोधी
बुलडोजर न्याय जैसे मनमाने फैसलों की मार अक्सर महिलाओं पर ही पड़ती है. इन सब के पीछे पुरुषवादी सोच काम करती है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है लेकिन बुलडोजर न्याय की मानसिकता खत्म नहीं हुई है.
![श्याम बेनेगल - ढह गया नेहरूवियन का अंतिम किला श्याम बेनेगल - ढह गया नेहरूवियन का अंतिम किला](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/871/1971251/7mvv2gkwk1737713464418/1737713929296.jpg)
श्याम बेनेगल - ढह गया नेहरूवियन का अंतिम किला
श्याम बेनेगल का भारतीय फिल्म में अतुलनीय योगदान रहा. उन का काम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया. उन की फिल्मों ने न केवल मनोरंजन बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण कदम उठाया.
![पर्सनैलिटी का आईना है डैस पर्सनैलिटी का आईना है डैस](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/871/1971251/ceeUrLVmD1737712998247/1737713270124.jpg)
पर्सनैलिटी का आईना है डैस
व्यक्तित्व को निखारने वाले कपड़े आप के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और आप की पहचान को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करते हैं. सही रंग, डिजाइन और फिटिंग न केवल आप की स्टाइल को सुधारते हैं, बल्कि आप के व्यक्तित्व का प्रभावशाली प्रदर्शन भी करते हैं. हर अवसर के लिए उपयुक्त पोशाक चुनना आप के व्यक्तित्व को और निखार सकता है.
![बेकार न समझें कार से जुड़ी ये बातें बेकार न समझें कार से जुड़ी ये बातें](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/871/1971251/hGXLYHr7g1737712284304/1737712504267.jpg)
बेकार न समझें कार से जुड़ी ये बातें
जीवन का एक और पहलू जिस में लोगों की बुरी आदतें होती हैं, चाहे उन्हें पता हो या न, वह है गाड़ी चलाते समय का. कोई भी व्यक्ति परफैक्ट ड्राइवर नहीं होता, लेकिन कुछ ऐसी ड्राइविंग आदतें होती हैं जो आने वाले समय में कार में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती हैं.
![अतुल सुभाष सुसाइड मामला - महिलाएं विलेन क्यों बनीं अतुल सुभाष सुसाइड मामला - महिलाएं विलेन क्यों बनीं](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/871/1971251/ZmnxX3Yg-1737702380544/1737702770096.jpg)
अतुल सुभाष सुसाइड मामला - महिलाएं विलेन क्यों बनीं
अतुल सुभाष की आत्महत्या का मामला ज्युडिशियल सिस्टम पर सवाल उठाता है. विडंबना यह है कि पूरी बहस महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनों को टारगेट करने पर केंद्रित हो गई है और इस घटना के चलते सभी महिलाओं को आरोपित किया जा रहा है.
![इंटरस्टेट मैरिज सुख की गारंटी इंटरस्टेट मैरिज सुख की गारंटी](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/871/1971251/2UFNI2gRE1737703365509/1737703777520.jpg)
इंटरस्टेट मैरिज सुख की गारंटी
भले ही इंटरस्टेट मैरिज का विरोध होता हो लेकिन आज के दौर में ज्यादातर ऐसी शादियां सफल होते दिख रही हैं. यह समाज में आ रहा एक छोटा सा ही सही सुखद बदलाव है जिस के सामने कट्टरवाद और सामाजिक व धार्मिक पूर्वाग्रह घुटने टेकते नजर आ रहे हैं.
![दीवार से ऊंचे - कास्ट और क्लास के गड्ढे दीवार से ऊंचे - कास्ट और क्लास के गड्ढे](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/871/1971251/60LRy1NDt1737706387795/1737706706689.jpg)
दीवार से ऊंचे - कास्ट और क्लास के गड्ढे
आर्थिक वर्णव्यवस्था कभी मानव कल्पना से परे की बात थी लेकिन अब समाज और सोच का हिस्सा बन गई है. एक ही जाति के लोग आपस में आर्थिक हैसियत के मुताबिक फर्क करने लगे हैं. यह भी भारतीय सामाजिक संरचना से मेल खाती बात नहीं थी, लेकिन अब है.
![हड्डियों को गलाती तंबाकू की लत हड्डियों को गलाती तंबाकू की लत](https://reseuro.magzter.com/100x125/articles/871/1971251/fJ2E53Byc1737706777110/1737707171087.jpg)
हड्डियों को गलाती तंबाकू की लत
भारत ही नहीं दुनियाभर में तंबाकू का भारी मात्रा में सेवन चिंता का विषय बनता जा रहा है, वह भी तब जब इस से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य संबंधित बीमारियां सब के सामने हैं.