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पेरैंटस के विवाद क्या करें टीनऐजर

Grihshobha - Hindi

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March Second 2025

मातापिता के झगड़ों में बच्चों की क्या भूमिका होनी चाहिए...

- शिखा जैन

पेरैंटस के विवाद क्या करें टीनऐजर

अकसर देखा जाता है कि मातापिता आपस से झगड़ते रहते हैं. वे कई दिनों तक एकदूसरे से बात नहीं करते हैं और कोई बात करनी हो तो टीनएजर उन के दूत बन जाते हैं. कभीकभी मां या पिता एकदूसरे के खिलाफ अपनी भड़ास टीनएजर के सामने निकालते हैं और कभीकभी टीनएजर को मांबाप में से किसी एक का पक्ष लेने के लिए कहा जाता है या फिर वे खुद ही किसी एक का पक्ष लेने लगते हैं अथवा फिर वे पेरेंट्स की लड़ाई के बीच में आ कर उसे सुलझाने का अससफल प्रयास करते हैं. इन में से कोई भी स्थिति टीनएजर के लिए ठीक नहीं है. आइए, जाने कैसे:

वियतनामी बौद्ध भिक्षु और मशहूर राइटर तिक न्यात हन्ह ने अपनी किताब 'फिडिलिटी : हाउ टू क्रिएट लविंग रिलेशनशिप दैट लास्ट्स' में इस बारे में लिखा है- पेरेंट्स के झगड़े का बच्चों पर असर. पेरेंट्स के झगड़े का बच्चों की मैंटल और इमोशनल हैल्थ पर गहरा प्रभाव पड़ता है. इस से वे तनाव महसूस कर सकते हैं और उन में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है. पेरेंट्स के बीच बहस और झगड़े को देख कर बच्चों में घबराहट और डर पैदा हो सकता है.

यह सही भी है क्योंकि अपने पेरेंट्स को लड़ते हुए देखना बच्चा हो या टीनएजर किसी को भी अच्छा नहीं लगता. दरअसल, यह उम्र ही ऐसी होती है कि वे सब समझने लायक हो जाते हैं और चाहते हैं कि मातापिता की लड़ाई में बीचबचाव करें और सिचुएशन को सही करने की कोशिश करें लेकिन यह आप का काम नहीं है. पेरेंट्स आप से बड़े हैं, समझदार हैं उन्हें अपना फैसला खुद लेने दें.

मनोचिकित्सकों की राय

कुछ मनोचिकित्सकों की इस बारे में राय होती है कि छोटे बच्चे अपने पैरेंट्स को लड़ते देख कर दुखी होने से ज्यादा डर जाते हैं और वहीं टीनएजर उस लड़ाई का हिस्सा बन कर किसी एक की साइड ले कर बोलना शुरू कर देते हैं या फिर उन में बीचबचाव कराना चाहते हैं. ये दोनों ही स्थितियां अच्छी नहीं हैं. जैसेकि अगर आप की गर्लफ्रैंड से मनमुटाव हो जाता है तो आप भी नहीं चाहेंगे कि कोई और आप दोनों के बीच आए उसी तरह पेरेंट्स को भी उन के हाल पर छोड़ दें.

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