गन्ने के पोक्काबोइंग रोग के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
पत्तों पर काले दाग: यह रोग काले रंग के छोटे-छोटे दागों के रूप में पत्तों पर प्रकट होता है। इन दागों का आकार विशेषतः छोटा होता है, लेकिन ये बढ़ सकते हैं और पत्तों के बड़े हिस्सों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
डंठलों की कमजोरी: गन्ने के पोक्काबोइंग रोग के कारण, पौधों के डंठल कमजोर हो जाते हैं और सड़ जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप पौधे मंद हो जाते हैं और उन्हें खाद्य पदार्थों की सही रूप से आपूर्ति नहीं होती है।
फूलों की कमजोरी: यह रोग फूलों की संख्या और गुणवत्ता पर भी असर डाल सकता है। पोक्काबोइंग रोग से प्रभावित होने वाले फूल आमतौर पर सामान्य से कम होते हैं और आनुवंशिक रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
वृद्धि में कमी: गन्ने के पोक्काबोइंग रोग के कारण पौधों की वृद्धि में कमी हो सकती है। ये रोगी पौधे कमजोर होते हैं और उनमें न्यूनतम पोषक तत्वों की आपूर्ति की वजह से गन्ने की उपज में कमी हो सकती है।
यदि आपके गन्ने के पौधों में उपरोक्त लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो आपको गन्ने के पोक्काबोइंग रोग की संभावित प्रादुर्भाव की जांच करने के लिए किसानी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
Bu hikaye Modern Kheti - Hindi dergisinin 1st September 2023 sayısından alınmıştır.
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मृदा में नमी की जांच और फायदे
नरेंद्र कुमार, संदीप कुमार आंतिल2, सुनील कुमार। और हरदीप कलकल 1 1 कृषि विज्ञान केंद्र सिरसा, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय 2 कृषि विज्ञान केंद्र, सोनीपत, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय
निस्तारण की व्यावहारिक योजना पर हो अमल
पराली जलाने से हुए प्रदूषण से निपटने के दावे हर साल किए जाते हैं, लेकिन आज तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। यह समस्या हर साल और विकराल होती चली जा रही है।
खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए कारगर है कृषि वानिकी
जैसे-जैसे विश्व की आबादी बढ़ती जा रही है, लोगों की खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती भी बढ़ रही है।
बढ़ा बजट उबारेगा कृषि को संकट से
साल था 1996 चुनाव परिणाम घोषित हो चुके थे और अटल बिहारी वाजपेयी को निर्वाचित प्रधानमंत्री के रुप में घोषित किया जा चुका था।
घट नहीं रही है भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की 'प्रधानता'
भारतीय अर्थव्यवस्था में एक विरोधाभास पैदा हो गया है। तेज आर्थिक विकास दर के फायदे कुछ लोगों तक सीमित हो गए हैं जबकि देश की आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है।
कृषि विकास का राह सहकारिता
भारत को 2028 तक पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का इरादा है और इसमें जिन तत्वों और सैक्टर के योगदान की जरुरत पड़ेगी, उनमें एक है सहकारिता क्षेत्र।
मधुमक्खियां भी हो रही हैं प्रभावित हवा प्रदूषण से
सर्दियों का मौसम आते ही देश के कई हिस्से प्रदूषण की आगोश में समा गए हैं, खासकर देश की राजधानी दिल्ली जहां सांसों का आपातकाल लगा हुआ है।
ज्वार की रोग एवं कीट प्रतिरोधी नई किस्म विकसित
भारत श्री अन्न या मोटे अनाज का प्रमुख उत्पादक है और निर्यात के मामले में भी हमारा देश दूसरे पायदान पर है।
खरपतवारों के कारण होता है फसली नुकसान
खरपतवार प्रबंधन पर एक संयुक्त अध्ययन में खुलासा हुआ है कि हर साल भारत में फसल उत्पादन में करीब 192,202 करोड़ रुपये का नुकसान खरपतवारों के कारण होता है।
जलवायु परिवर्तन बनाम कृषि विकास...
कृषि और प्राकृतिक स्रोतों पर आधारित उद्यम न केवल भारत बल्कि ज्यादातर विकासशील देशों की आर्थिक उन्नति का आधार हैं। कृषि क्षेत्र और इसमें शामिल खेत फसल, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, पॉल्ट्री संयुक्त राष्ट्र के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों खासकर शून्य भूखमरी, पोषण और जलवायु कार्रवाई तथा अन्य से जुड़े हुए हैं।