
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक गैर-दलित महिला और एक दलित व्यक्ति के बीच विवाह को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इसी के साथ पति को अपने नाबालिग बच्चों के लिए अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने का आदेश दिया, जो पिछले छह वर्षों से अपनी मां के साथ रह रहे है। अदालत ने फैसला सुनाया कि गैर-दलित मां और दलित पिता से पैदा हुए बच्चे अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा पाने के हकदार हैं।
Bu hikaye Hari Bhoomi dergisinin December 07, 2024 sayısından alınmıştır.
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