Facebook Pixel {العنوان: سلسلة} | {اسم المغناطيس: سلسلة} - {الفئة: سلسلة} - اقرأ هذه القصة على Magzter.com

يحاول ذهب - حر

सिलबट्टा नहीं सिलबट्टी मानसिकता की शिकार महिलाएं

April First 2025

|

Sarita

महिलाएं थकान की शिकार हो रही हैं, बीमारियों से घिर रही हैं लेकिन उफ भी नहीं कर रहीं, समानता की मांग नहीं कर रहीं. वे यह भी नहीं पूछ पा रहीं कि उन के कमाए पैसों पर उन का पूरा हक क्यों नहीं.

- भारत भूषण श्रीवास्तव

सिलबट्टा नहीं सिलबट्टी मानसिकता की शिकार महिलाएं

पिछले दिनों ओटीटी पर रिलीज हुई हिंदी फिल्म 'मिसेज' मलयालम फिल्म 'द ग्रेट इंडियन किचन' की रीमेक है. इस फिल्म को मीडिया ने उतना भाव दिया नहीं जिस की वह हकदार थी. कोई नहीं चाहता खासतौर से मनुवादी मीडिया तो रत्तीभर भी नहीं कि समाज के पौराणिक सचों को उजागर करते साहित्य और फिल्मों पर बात की जाए. भक्त मीडिया दलित, शूद्रों की बात करते डरता है. वह स्त्री विमर्श से भी डरता है क्योंकि ये और ऐसे विषय धर्म की रूढ़ियों की और पितृसत्ता की पोल खोलते हैं.

'मिसेज' इस का अपवाद नहीं है. कैसे और क्यों इस की भरसक अनदेखी की गई, यह जानने से पहले इस की विषयवस्तु थोड़े में ही समझें तो लगता है कि निर्देशक आरती कदव ने रियल लाइफ को रील में ज्यों का त्यों उतार दिया है. कुछ अतिशयोक्तियों के साथ ही सही लेकिन यह केवल पेशे से डांसर ऋचा की ही नहीं, बल्कि लगभग हरेक औरत की कहानी है.

ऋचा जब शादी कर पति के घर आती है तो उसे एहसास होता है कि यह परिवार बेहद परंपरावादी है, जिस में घर के पुरुष खाट तोड़ते रहते हैं और महिलाएं घरेलू कामकाज में गुलामों की तरह खटती रहती हैं. यानी, परिवार पूरी तरह पितृसत्तात्मक है. वह नौकरी करना चाहती है लेकिन ससुर इस की इजाजत नहीं देता क्योंकि इस से मुफ्त की नौकरानी हाथ से निकल जाती और बहू कमाऊ हो तो शोषण के खिलाफ विद्रोह भी कर सकती है.

एक दृश्य में बड़ी सहजता से दिखाया गया है कि सास कुरसी तोड़ते ससुर के टूथब्रश में पेस्ट लगा कर देती है. घर की औरतों को मर्दों से पहले खाने की इजाजत नहीं. मुद्दे की बात ससुर का इस बात पर ऋचा को कोसना या नसीहत देना है कि वह सिलबट्टे पर पिसी चटनी ही खाएगा, मिक्सी की नहीं. यहां हर कोई या कोई भी सासससुर का पक्ष लेते यह दलील देते फेमिनिज्म का विरोध कर सकता है कि अब तो सिलबट्टा रसोई से गायब है. इस्तेमाल मिक्स्चर ग्राइंडर का ही होता है. बात सही है लेकिन निर्देशक की मंशा दरअसल सिलबट्टी मानसिकता को उकेरने की है और वे इस में कामयाब भी रही हैं.

image

المزيد من القصص من Sarita

Sarita

Sarita

सरकार पर घटता भरोसा

डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरती कीमत और नोटबंदी की फैलती रहती अफवाहों के बीच जनता अपने ही देश की सरकार की नीयत पर भरोसा नहीं कर पा रही है.

time to read

5 mins

February Second 2026

Sarita

Sarita

हाशिए पर पड़े नेता न घर के न घाट के

राजनीति हर किसी के बस की बात नहीं, उन लोगों के बस की तो कतई नहीं जिन का मूल पेशा यह नहीं था और जिन का था वे प्रतिबद्धता से कर नहीं पाए.

time to read

13 mins

February Second 2026

Sarita

Sarita

वेनेजुएला में दखल अमेरिका अब सब का दुश्मन

अमेरिकी विदेश नीति का इतिहास इस सच्चाई का गवाह रहा है कि जहां भी अपार प्राकृतिक संसाधन हैं, वहां लोकतंत्र, मानवाधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे शब्दों का जाल बिछा कर वह उन संसाधनों को अपने कब्जे में लेने के लिए सैन्य कार्रवाइयां करता रहा है.

time to read

8 mins

February Second 2026

Sarita

Sarita

किराएदारों की मुश्किलें और बदलती शहरी व्यवस्था

शहरों में किराएदारी एक अनिवार्य सामाजिक आवश्यकता बन चुकी है. रोजगार, पढ़ाई और छोटे व्यवसायों के लिए गांवों से शहरों की ओर जाने का सिलसिला जितनी तेजी से बढ़ा है, रहने की जगह ढूंढ़ना उतना ही कठिन होता गया है. प्रवासी मजदूर, कामकाजी युवकयुवतियां, छोटे परिवार और छात्र, इन सब की सब से पहली जरूरत एक कमरे या छोटे मकान की होती है परंतु यह जरूरत आज संघर्ष में बदल गई है.

time to read

6 mins

February Second 2026

Sarita

Sarita

पहला स्पर्श

किशोरावस्था में मोनिका और समय के नादान दिलों ने पहले स्पर्श का जो एहसास किया था वह आज युवावस्था में भी उन को भीतर तक तरंगित कर जाता था.

time to read

10 mins

February Second 2026

Sarita

Sarita

ऊपर की मंजिल

अच्छी बेटी की जिम्मेदारी निभाते हुए सिमरन जैसे थक सी गई थी. मां की मृत्यु पर दोनों भाइयों का आना जैसे उसे तसल्ली दे रहा था. लेकिन क्या यह सुख क्षणभर का था?

time to read

9 mins

February Second 2026

Sarita

Sarita

यूजीसी

बराबरी लाने के नए नियम तोड़ गए संयम

time to read

17 mins

February Second 2026

Sarita

Sarita

एक और परिणीता

स्वर्णा ने खुद को एक दायरे तक सीमित रखा हुआ था. शिवेन का उस दायरे में प्रवेश स्वर्णा को सही नहीं लगा था लेकिन उस की यह सोच कितनी गलत थी?

time to read

7 mins

February Second 2026

Sarita

Sarita

जींस वाली जिंदगी

आज जींस सिर्फ पहनने का कपड़ा नहीं रह गई है, बल्कि यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है.

time to read

4 mins

February Second 2026

Sarita

Sarita

सिर्फ 5 युवा जिन्होंने 1863-1890 में जापान को बदल डाला

चोशू 5 वे युवा थे जो 1863 में जापान से निकले और 1868 में लौटे.

time to read

18 mins

February Second 2026

Listen

Translate

Share

-
+

Change font size