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Vivek Jyoti  Cover - March 2025 Edition
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Vivek Jyoti - March 2025Add to Favorites

Vivek Jyoti Magazine Description:

Verlag: Ramakrishna Mission, Raipur

Kategorie: Religious & Spiritual

Sprache: Hindi

Häufigkeit: Monthly

भारत की सनातन वैदिक परम्परा, मध्यकालीन हिन्दू संस्कृति तथा श्रीरामकृष्ण-विवेकानन्द के सार्वजनीन उदार सन्देश का प्रचार-प्रसार करने के लिए स्वामी विवेकानन्द के जन्म-शताब्दी वर्ष १९६३ ई. से ‘विवेक-ज्योति’ पत्रिका को त्रैमासिक रूप में आरम्भ किया गया था, जो १९९९ से मासिक होकर गत 60 वर्षों से निरन्तर प्रज्वलित रहकर यह ‘ज्योति’ भारत के कोने-कोने में बिखरे अपने सहस्रों प्रेमियों का हृदय आलोकित करती रही है । विवेक-ज्योति में रामकृष्ण-विवेकानन्द-माँ सारदा के जीवन और उपदेश तथा अन्य धर्म और सम्प्रदाय के महापुरुषों के लेखों के अलावा बालवर्ग, युवावर्ग, शिक्षा, वेदान्त, धर्म, पुराण इत्यादि पर लेख प्रकाशित होते हैं ।

आज के संक्रमण-काल में, जब भोगवाद तथा कट्टरतावाद की आसुरी शक्तियाँ सुरसा के समान अपने मुख फैलाएँ पूरी विश्व-सभ्यता को निगल जाने के लिए आतुर हैं, इस ‘युगधर्म’ के प्रचार रूपी पुण्यकार्य में सहयोगी होकर इसे घर-घर पहुँचाने में क्या आप भी हमारा हाथ नहीं बँटायेंगे? आपसे हमारा हार्दिक अनुरोध है कि कम-से-कम पाँच नये सदस्यों को ‘विवेक-ज्योति’ परिवार में सम्मिलित कराने का संकल्प आप अवश्य लें ।

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In dieser Angelegenheit

1. श्रीरामकृष्ण के उपदेश हमारे लिए विशेष कल्याणकारी हैं : विवेकानन्द १०२
2. शिवभाव से जीवसेवा (स्वामी अलोकानन्द) १०५
3. दैवी सम्पदरूप श्रीरामकृष्ण (स्वामी दयापूर्णानन्द) ११२
4. (बच्चों का आंगन) वैदिक नारी अपाला (श्रीमती मिताली सिंह) ११७
5. स्वामी विवेकानन्द के विचारों के आलोक में नारी सशक्तिकरण
(नम्रता वर्मा) ११८
6. (युवा प्रांगण) अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस – प्रेरणा
और सशक्तिकरण का उत्सव (स्वामी गुणदानन्द) १२१
7. स्वामी ब्रह्मानन्द और भुवनेश्वर (स्वामी तन्निष्ठानन्द) १२५
8. चोवा, चन्दन, अरगजा वीथिन में रच्यौं है गुलाल (लक्ष्मीनारायण तिवारी) १३०
9. व्याकुल योग (नवीन चन्द्र मिश्र) १३३
10. (कविता) आजु काशी भाग मचावे जोगिया
(डॉ. अनिल कुमार ‘फतेहपुरी’) 1०९
11. (कविता) रामकृष्ण प्रभु का गुण गाता (डॉ. ओमप्रकाश वर्मा) १११
12. स्वामी विवेकानन्द-वन्दना(डॉ. रामकुमार गौड़) १२३
13. (कविता) प्रभु मैथिलीश्वर त्वं स्वयम् (स्वामी मैथिलीशरण),
रामकृष्ण कृपालु भगवन् (डॉ. श्रीधर प्रसाद द्विवेदी) १२४
14. ब्रज मंडल धूम मचाओ रसिया(डॉ. अनिल कुमार ‘फतेहपुरी’) १३१

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