चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग, जी-20 के आयोजन और भारत के लक्ष्यों पर इस सत्र के दौरान व्यापक चर्चाओं की संभावना थी। यह भी उम्मीद थी कि शायद सरकार देश का नाम इंडिया के बजाय केवल भारत रखने सम्बन्धी फैसला ले सकती है। यह भी कयास थे कि शायद यूनिफॉर्म सिविल कोड पर कोई फैसला हो, एक देश एक चुनाव पर कोई निर्णय हो या फिर पुराने संसद भवन को अलविदा कहने और नवनिर्मित संसद भवन में प्रवेश करने की औपचारिकता पूरी की जाये। इन सभी कयासों में एक यह भी था कि विभिन्न राज्यों की चुनाव पूर्व की बेला में महिला आरक्षण विधेयक भी पारित करा दिया जाये। हालांकि इस सत्र के लिये 18 से 22 सितंबर के बीच की तिथि चुने जाने पर शिव सेना सहित कई दलों ने हैरानी जताई थी। क्योंकि इन्हीं दिनों में देश के बड़े हिस्से में गणेश चतुर्थी जैसा महत्वपूर्ण त्यौहार आयोजित किया जा रहा था। और अनेक राजनेता इस त्यौहार में व्यस्त रहा करते हैं। शिव सेना (उद्धव) ने तो इसके लिए चुनी गई तारीखों पर आश्चर्य जताते हुये यहां तक कह दिया था कि - गणेश चतुर्थी के त्योहार के समय ये विशेष सत्र बुलाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है और हिंदू भावनाओं के विरुद्ध है। परन्तु संसद का यह विशेष सत्र सत्र बुलाया तो जरूर गया परन्तु 22 सितंबर तक चलने वाला विशेष सत्र 21 सितंबर को ही समाप्त कर दिया गया।
Diese Geschichte stammt aus der October 2023-Ausgabe von Open Eye News.
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