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टीनऐजर्स के साथ जब बढ जाए कम्यूनिकेशन गैप
Grihshobha - Hindi
|August Second 2024
जब युवा बच्चों के बीच बातचीत होने कम हो जाएं तो मातापिता को क्या करना चाहिए...
मुझे याद है जब मैं करीब 15 साल की थी. 10वीं क्लास की पढ़ाई का प्रैशर और अपनी मनमानी न कर पाने का गुस्सा अलग ही अनुभवों की लिस्ट सी बनाता चला गया और युवा होतेहोते इस का अंदाजा भी नहीं लगा.
उन में से एक था बात बात पर गुस्सा हो कर मम्मी पापा से बात करना छोड़ देना. मम्मी कहीं जाने से मना कर देतीं तो कभी पापा अपनी पसंदीदा ड्रैस के लिए पैसे देने से मना कर देते. रोती और गुस्सा होती और कईकई दिन तक मम्मी पापा से बात नहीं करती.
अन्य टीनऐजर्स बच्चों की तरह मैं भी अपने पेरेंट्स से दिनभर की बातें करती थी जैसे दिनभर की थकान, स्कूल में मैडम की डांट तो क्लासमेट से हुई नोकझोंक सबकुछ बताती थी, फिर धीरेधीरे सब छूटने लगा.
गुस्सा करना और बात न करना एक आदत सी बनता चला गया. शुरूशुरू में मम्मीपापा भी हंस कर टाल देते थे. मनाने की कोशिश करते, हंसाने की कोशिश भी करते. लेकिन मैं अपनी जिद्द पर अड़ी रहती, न बात करती और न ही उन की बातों का जवाब देती. फिर धीरेधीरे वह भी बंद हो गया. कम्यूनिकेशन गैप बढ़ता चला गया. आखिर यह भी कितना अपने आप को एक ही चीज के लिए फोर्स करते.
खेलते हुए हम लोग गंभीर से हो गए, युवा होने तक ऐसा ही रहा और आज भी है, पेरेंट्स और टीनऐजर्स के बीच कम्यूनिकेशन गैप का बढ़ जाना ठीक नहीं है. बाद में यह आप को अलगथलग कर देता है. इसलिए पेरेंट्स के साथ अपना कम्यूनिकेशन बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है.
आइए, जाने अपने और अपने पेरेंट्स के बीच कम्यूनिकेशन को कैसे ठीक रखा जा सकता है:
बातचीत के लिए रहें हमेशा औपन
Diese Geschichte stammt aus der August Second 2024-Ausgabe von Grihshobha - Hindi.
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