नए-नवेले, खासकर ओटीटी के सितारों की चर्चा कई वजहों से अहम और दिलचस्प है ! वमिका गब्बी, जितेंद्र कुमार, रसिका दुग्गल, दुर्गेश कुमार, अशोक पाठक, दिव्येंदु, ये कुछ ऐसे नाम हैं जिनके अभिनय करिअर को एक जबरदस्त मोड़ दिया वेब सीरीज की सफलता ने! कुछ वक्त पहले एक इंटरव्यू में अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा था कि ओटीटी पुराने और असफल सितारों का आश्रय बनता जा रहा है, लेकिन शायद अब उन्हें भी इस बात न का एहसास होगा कि ओटीटी को संकुचित नजर से देखना मुमकिन नहीं है। ये वैश्विक प्लेटफॉर्म अदाकारी, कहानियों और ऑडियंस से रिश्ते के लिहाज से अहम है और मनोरंजन उद्योग को नई दिशाएं देने की ताकत रखता है। बात कलाकारों के करियर को नई जिंदगी मिलने की हो या फिर कस्बों से निकले अभिनेता/अभिनेत्रियों को नया सितारा मानने की, यह इस बात का संकेत है कि दर्शकों में उन्हें देखने की चाहत है जबकि सिनेमा की अर्थव्यवस्था का स्टार आधारित ढांचा उन्हें न बिकने वाले सामान की तरह कतार में पीछे धकेल कर जोखिम से बचने में ही अपनी बेहतरी मानता है।
डिजिटल एंटरटेनमेंट के मंच सिर्फ भुला दिए गए कलाकारों का नया सहारा नहीं बन रहे हैं, बल्कि इनकी वजह से स्टार और स्टारडम की परिभाषा में नए आयाम भी जुड़ रहे हैं। स्टारडम अपने आप में एक बहुआयामी सामाजिक-आर्थिक अवधारणा है जिसमें कलाकारी, शोहरत, रणनीति, पैसा, मुनाफा, श्रम, सम्मोहन, प्रेम और प्रभुत्व जैसे तमाम पहलू समाए हुए हैं। इसका मतलब यह है कि मनोरंजन जगत और उसके बाहर भी- जैसे खेलों की दुनिया में- सितारे बनने-बनाने की प्रक्रिया सांस्कृतिक-राजनीतिक है। इसमें दर्शक, मीडिया और तकनीक की अहम भूमिका होती है।
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गांधी पर आरोपों के बहाने
गांधी की हत्या के 76 साल बाद भी जिस तरह उन पर गोली दागने का जुनून जारी है, उस वक्त में इस किताब की बहुत जरूरत है। कुछ लोगों के लिए गांधी कितने असहनीय हैं कि वे उनकी तस्वीर पर ही गोली दागते रहते हैं?
जिंदगी संजोने की अकथ कथा
पायल कपाड़िया की फिल्म ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट परदे पर नुमाया एक संवेदनशील कविता
अश्विन की 'कैरम' बॉल
लगन और मेहनत से महान बना खिलाड़ी, जो भारतीय क्रिकेट में अलग मुकाम बनाने में सफल हुआ
जिसने प्रतिभाओं के बैराज खोल दिए
बेनेगल ने अंकुर के साथ समानांतर सिनेमा और शबाना, स्मिता पाटील, नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, गिरीश कार्नाड, कुलभूषण खरबंदा और अनंतनाग जैसे कलाकारों और गोविंद निहलाणी जैसे फिल्मकारों की आमद हिंदी सिनेमा की परिभाषा और दुनिया ही बदल दी
सुविधा पचीसी
नई सदी के पहले 25 बरस में 25 नई चीजें, जिन्होंने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह से बदल डाली
पहली चौथाई के अंधेरे
सांस्कृतिक रूप से ठहरे रूप से ठहरे हुए भारतीय समाज को ढाई दशक में राजनीति और पूंजी ने कैसे बदल डाला
लोकतंत्र में घटता लोक
कल्याणकारी राज्य के अधिकार केंद्रित राजनीति से होते हुए अब डिलिवरी या लाभार्थी राजनीति तक ढाई दशक का सियासी सफर
नई लीक के सूत्रधार
इतिहास मेरे काम का मूल्यांकन उदारता से करेगा। बतौर प्रधानमंत्री अपनी आखिरी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस (3 जनवरी, 2014) में मनमोहन सिंह का वह एकदम शांत-सा जवाब बेहद मुखर था।
दो न्यायिक खानदानों की नजीर
खन्ना और चंद्रचूड़ खानदान के विरोधाभासी योगदान से फिसलनों और प्रतिबद्धताओं का अंदाजा
एमएसपी के लिए मौत से जंग
किसान नेता दल्लेवाल का आमरण अनशन जारी लेकिन केंद्र सरकार पर असर नहीं