फसलों में फर्टिगेशन (टपक सिंचाई) एवं उससे होने वाले लाभ
Modern Kheti - Hindi|1st February 2024
आज भारत में फसलों की सिंचाई, उद्योग, आवास और बढ़ती जनसंख्या के कारण जल, जंगल और जमीन भारी दबाव में है। विश्व की बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ-साथ हमें खाद्यान्न पूर्ति के लिए नई-नई तकनीक अपनाने की आवश्यकता पर ध्यान देना होगा, जिसमें सिंचाई की नयी पद्वतियाँ, उन्नतशील प्रजातियाँ, मृदा को बिना हानि पहुंचाने वाले उर्वरक, ऊर्जा का समुचित उपयोग व खाद्यान्न गुणवत्ता को बनाये रखने आदि की ओर ध्यान देना होगा।
डॉ. प्रदीप राजपूत, डॉ. रविन्द्र कुमार राजपूत डॉ. नन्दराम राजपूत, डॉ. अनुपमा वर्मा
फसलों में फर्टिगेशन (टपक सिंचाई) एवं उससे होने वाले लाभ

इस लेख में फर्टिगेशन तकनीक एवं उससे होने वाले लाभ के बारे में किसानों को बताने की कोशिश की है। फर्टिगेशन दो शब्दों फर्टिलाइजर अर्थात उर्वरक और इरिगेशन अर्थात सिंचाई से मिलकर बना है। पाइप द्वारा पौधें को बूंद-बूंद करके सिंचाई के साथ-साथ उर्वरकों को भी पौधों तक पहुंचना फर्टिगेशन कहलाता है। ड्रिप सिंचाई में जिस प्रकार ड्रिपरों के द्वारा बूंदबूंद करके जल दिया जाता है, उसी प्रकार उर्वरकों को सिंचाई जल में मिश्रित कर उर्वरक ड्रिपरों द्वारा सीधे पौधों तक पंहुचाया जा सकता है। सिंचाई पानी के साथ उर्वरकों को फसल एवं मृदा की आवश्यकताओं के अनुरूप उर्वरक व जल का समुचित स्तर बनाये रखने के लिए अच्छी तकनीक है। फर्टिगेशन द्वारा उर्वरकों को कम मात्रा में जल्दी-जल्दी और कम अन्तराल पर पूर्व नियोजित सिंचाई के साथ दे सकते हैं, इससे पौधों को आवश्यकतानुसार पोषक तत्व मिल जाते हैं और मूल्यवान उर्वरकों का निच्छालन द्वारा अपव्यय भी नहीं होता है। सामान्यतः फर्टिगेशन में तरल उर्वरकों का ही प्रयोग करते हैं परन्तु दानेदार और शुष्क उर्वरकों को भी फर्टिगेशन के द्वारा दिया जा सकता है। फर्टिगेशन के द्वारा शुष्क उर्वरकों को देने से पूर्व उनका जल में घोल बनाया जाता है। उर्वरकों के जल में घोलने की दर उनकी विलेयता और जल के तापमान पर निर्भर करती है। उर्वरकों के घोल को फर्टिगेशन से पहले छान लेना चाहिए।

फर्टिगेशन से उर्वरक देने की विधि में कार्य दक्षता निम्न प्रकार: पोषक तत्वों

फर्टिगेशन में किस प्रकार के उर्वरक का प्रयोग होता है: 

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