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नागा साधुओं के श्रृंगार हैं अद्भुत
Jyotish Sagar
|January 2025
नागाओं की एक अलग ही रहस्यमय दुनिया होती है। चाहे नागा बनने की प्रक्रिया हो अथवा उनका रहन-सहन, सब-कुछ रहस्यमय होता है। नागा साधुओं को वस्त्र धारण करने की भी अनुमति नहीं होती।
अगर वस्त्र धारण करने हों, तो सिर्फ गेरुए रंग के वस्त्र ही नागा साधु पहन सकते हैं। वह भी सिर्फ एक वस्त्र, इससे अधिक गेरुए वस्त्र नागा साधु धारण नहीं सकते। नागा साधुओं को शरीर पर सिर्फ भस्म लगाने की अनुमति होती है। नागाओं का यह शृंगार सिर्फ कुम्भ के दौरान होने वाले शाही स्नान के वक्त नजर आता है। मान्यता है कि सभी शृंगार से युक्त नागा साधु के दर्शन होने से कई जन्मों का पुण्य मिलता है। अखाड़ों से जुड़े नागा सन्तों का कहना है कि इस श्रृंगार की एक विधि है और यह सिर्फ खास अवसर पर किया जाता है। 17 शृंगारों से सुसज्जित नागा साधु अपने इष्ट यानी भगवान् भोलेनाथ तथा भगवान् विष्णु की पूजा करते हैं।
ऐसे करते हैं श्रृंगार एक नागा के शृंगार में लंगोट, भभूत, चन्दन, पैरों में लोहे या फिर चाँदी का कड़ा, अँगूठी, पंचकेश, कमर में फूलों की माला, माथे पर रोली का लेप, कुण्डल, हाथों में चिमटा, डमरू या कमण्डल, गुँथी हुई जटाएँ और तिलक, काजल, हाथों में कड़ा, बदन में विभूति का लेप और बाहों पर रुद्राक्ष की माला शामिल होती है। आमतौर पर एक सुहागिन महिला 16 श्रृंगार करती है, लेकिन एक नागा साधु अपने 17वें शृंगार के लिए जाने जाते हैं। 17वाँ शृंगार है 'भस्म', जो कि नागा साधुओं का एकमात्र परिधान होता है। प्रत्येक नागा साधु अपने शरीर पर इस सफेद भस्म और रुद्राक्ष की मालाओं के अलावा कुछ नहीं पहनता। मान्यता है कि भगवान् शंकर ऐसे ही 11 हजार रुद्राक्ष मालाएँ धारण करते हैं।

このストーリーは、Jyotish Sagar の January 2025 版からのものです。
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