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सास बदली लेकिन नजरिया नहीं

Sarita|February First 2025
सास और और बहू को एकदूसरे की भूमिका को स्वीकार करना चाहिए. सास पुरानी परंपराओं का पालन करते हुए बहू को सिखा सकती है और बहू नई सोच व नए दृष्टिकोण से घर को बेहतर बना सकती है.
- रुचिदा राज
सास बदली लेकिन नजरिया नहीं

बहूरानी तो बढ़िया ही है. दीवाली पर आई तो रंगोली बनाई, घर भी सजाया, लेकिन क्या बताएं इन आजकल की लड़कियों को एक दिन बाजार गए थे तो पीछे से मेरी ननद आ गई. बताइए भला, किचन में जा कर चाय तक न बनी इन से. घर पहुंचे तो देखा कि नाश्ता, चाय सब बाजार से आया और मेरी ननद जो जिंदगीभर ताने मारती रहीं, कहती हैं, भाभी कुछ भी कहो, खुशनसीब हो. ऐसी बहू तो नसीब वालों को मिलती है. पति भी प्रसन्न कि उन की बहन तारीफ झोंके जा रही है. अब क्या ही कहते कि हम जो किचन में जान देते रहे तब तो तारीफ करने में शब्द ही खो गए.

करुणा भले ही अपनी सखियों को अपना दुखड़ा सुना रही थी लेकिन उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि उसे दुख बहू के काम न आने का है या फिर उस की तारीफ से वह जल रही है.

" यही दुख संगीता का भी है कि बहू वैसे तो बहुत अच्छी है, आगेपीछे डोलती है लेकिन जैसे ही किचन का कोई काम होता है, गायब हो जाती है. “उसे क्यों नहीं दिखता कि सास काम कर रही है तो उसे भी मदद के लिए खड़ा होना चाहिए. इतना अपनापन तो होना ही चाहिए. वह यह भी कहना नहीं भूलती कि हम ने अपनी सासजेठानियों को इतना आराम दिया लेकिन मेरी किस्मत में आराम कहां ?" कुछ यही हाल नीलिमा का भी है. पूरी जिंदगी नौकरी की. पूरा घर एक ढर्रे पर चलाया. पति को भी हाथ में कपड़े पकड़ाए, कभी चाय तक नहीं बनाने दी लेकिन तब कुछ दरकता नजर आया जब पुणे में काम करने वाली बहू त्योहार पर घर आई. हर काम के लिए बेटे को साथ में जुटाए रखती.

वह कहती है, “जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो बेटे को बोला तो उस ने जवाब पकड़ा दिया कि मम्मी आप को तो खुश होना चाहिए. कभी पापा ने आप की मदद नहीं की, जबकि आप बीमार तक हो जाती थीं. मैं ऐसा नहीं कर सकता. आप खुश क्यों नहीं हो रहीं इस बात से?"

बची है सास में उम्मीद

गलती किस की है ? कहां है? पिछले 20 सालों में जमाना इतना बदला कि उस की आंधी में सबकुछ बदल गया.

Denne historien er fra February First 2025-utgaven av Sarita.

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