Facebook Pixel केकड़ी के अष्टमुखी शिवलिंग | Jyotish Sagar - religious-spiritual - Lees dit verhaal op Magzter.com

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केकड़ी के अष्टमुखी शिवलिंग

Jyotish Sagar

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February 2025

शिवलिंग का वृत्ताकार ऊर्ध्वभाग ब्रह्माण्ड का द्योतक माना जाता है। इस मन्दिर में पशुपतिनाथ के साथ उनके परिवार (शिव परिवार) की सुन्दर एवं वृहद् प्रतिमाओं को भी स्थापित किया गया है।

- पुष्पा शर्मा

केकड़ी के अष्टमुखी शिवलिंग

भारत के इतिहास में शिल्पकला एवं पुरातत्त्व प्रमुख स्थान है। इससे भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की विशेषताओं के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त होती है। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के उत्खनन ने भारतीय धार्मिक इतिहास पर भी बहुत प्रकाश डाला है। सिन्धु तटवर्तिनी सभ्यता में शिव पूजा का बाहुल्य दिखाई पड़ता है। प्राचीन इतिहास से ज्ञात होता है कि यहाँ से प्राप्त दो प्रकार की शिव मूर्तियों एवं मुहरों में शिव त्रिमुखी हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश का ब कराती हैं। मोहनजोदड़ो मुहर में योगावस्था में बैठे ध्यानी शिव की है, जिसमें अनादि देव मध्य में विराजित हैं और उनके चहुँओर पशु की आकृतियाँ अंकित हैं। शिव का पशुपति स्वरूप है। पं. वासुदेव उपाध्याय के अनुसार ऋग्वेद में दो स्थानों पर 'शिश्न देवा:' शब्द आया है, अत: अनुमान है कि आर्यों में शिवलिंग पूजा थी। ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक प्रमाणों से ज्ञात होता है कि राजपूताने में भी शिव पूजा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। अजमेर संभाग का केकड़ी अपनी समन्वय संस्कृति एवं पुरावैभव के कारण इतिहास में विशेष स्थान रखत

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