- क्यों किसान तनाव में जी रहे हैं, और उन्हें संकट की स्थिति से निकालने के लिए क्या किये जाने की जरूरत है? यह मानते हुए कि जब देश में किसानों की औसत मासिक आय (कृषक परिवारों के ताजा सिचुएशनल एसेसमेंट सर्वे के मुताबिक) बमुश्किल 10, 218 रुपये बैठती है, तो कृषि आमदन में वृद्धि करने की तुरंत जरूरत है।
विश्व में सबसे पुराने नीलामी घरों में से एक है न्यूयार्क स्थित ऑक्शन हाउस सोदबी 'ज, जिसे अब पेंटिंग, कलाकृतियों व प्रतिष्ठापूर्ण आभूषणों के बजाये कृषि पदार्थों के मूल्यों की ओर रुख करने पर विचार करना चाहिये। अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए सोदबीज कृषि पदार्थों की कीमतों पर भी नीलामी शुरू करने की सोच सकता है।
यदि नीलामी घर कृषि उपज की ज्यादा ऊंची कीमतें प्राप्त करने का उद्यम शुरू करता है, वह भी ऐसे वक्त जब भारत में लोकतंत्र का उत्सव यानी चुनाव प्रक्रिया जारी हो तो वैश्विक स्तर पर सोदबी ज एक लोकप्रिय नाम के तौर पर उभरकर सामने आयेगा। केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में किसान उस नीलामी पर पैनी नजर रखेगा।
दरअसल, बीते दिनों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश व राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्रों में किसानों के लिए किये वादों में अंतर मालूम करना मुश्किल हो रहा था, तो शायद सोदबी 'ज़ किसानों को बेहतरीन कीमतें प्रदान करके कुछ और अच्छा कर सकती थी।
ज्यादा महत्वपूर्ण यह कि ऐसी किसी नीलामी के बाद जो अंतिम कीमत सामने आती है किसान को उस पर और ज्यादा यकीन होगा, इस उम्मीद के चलते कि नीलामी में भागीदारी कर रहे राजनीतिक दल अपने किये वादे से पीछे नहीं हटेंगे। चुनावी राज्य मध्यप्रदेश में सबसे पहले जारी किये गये कांग्रेस घोषणा पत्र में गेहूं और धान के लिए ज्यादा ऊंची कीमतें प्रदान करने का वादा था।
This story is from the December 15, 2023 edition of Modern Kheti - Hindi.
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मृदा में नमी की जांच और फायदे
नरेंद्र कुमार, संदीप कुमार आंतिल2, सुनील कुमार। और हरदीप कलकल 1 1 कृषि विज्ञान केंद्र सिरसा, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय 2 कृषि विज्ञान केंद्र, सोनीपत, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय
निस्तारण की व्यावहारिक योजना पर हो अमल
पराली जलाने से हुए प्रदूषण से निपटने के दावे हर साल किए जाते हैं, लेकिन आज तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। यह समस्या हर साल और विकराल होती चली जा रही है।
खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए कारगर है कृषि वानिकी
जैसे-जैसे विश्व की आबादी बढ़ती जा रही है, लोगों की खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती भी बढ़ रही है।
बढ़ा बजट उबारेगा कृषि को संकट से
साल था 1996 चुनाव परिणाम घोषित हो चुके थे और अटल बिहारी वाजपेयी को निर्वाचित प्रधानमंत्री के रुप में घोषित किया जा चुका था।
घट नहीं रही है भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की 'प्रधानता'
भारतीय अर्थव्यवस्था में एक विरोधाभास पैदा हो गया है। तेज आर्थिक विकास दर के फायदे कुछ लोगों तक सीमित हो गए हैं जबकि देश की आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है।
कृषि विकास का राह सहकारिता
भारत को 2028 तक पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का इरादा है और इसमें जिन तत्वों और सैक्टर के योगदान की जरुरत पड़ेगी, उनमें एक है सहकारिता क्षेत्र।
मधुमक्खियां भी हो रही हैं प्रभावित हवा प्रदूषण से
सर्दियों का मौसम आते ही देश के कई हिस्से प्रदूषण की आगोश में समा गए हैं, खासकर देश की राजधानी दिल्ली जहां सांसों का आपातकाल लगा हुआ है।
ज्वार की रोग एवं कीट प्रतिरोधी नई किस्म विकसित
भारत श्री अन्न या मोटे अनाज का प्रमुख उत्पादक है और निर्यात के मामले में भी हमारा देश दूसरे पायदान पर है।
खरपतवारों के कारण होता है फसली नुकसान
खरपतवार प्रबंधन पर एक संयुक्त अध्ययन में खुलासा हुआ है कि हर साल भारत में फसल उत्पादन में करीब 192,202 करोड़ रुपये का नुकसान खरपतवारों के कारण होता है।
जलवायु परिवर्तन बनाम कृषि विकास...
कृषि और प्राकृतिक स्रोतों पर आधारित उद्यम न केवल भारत बल्कि ज्यादातर विकासशील देशों की आर्थिक उन्नति का आधार हैं। कृषि क्षेत्र और इसमें शामिल खेत फसल, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, पॉल्ट्री संयुक्त राष्ट्र के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों खासकर शून्य भूखमरी, पोषण और जलवायु कार्रवाई तथा अन्य से जुड़े हुए हैं।